उत्तराखंड

चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की जान बचाने को सतर्कता जरूरी, अब तक हो चुकी है 16 यात्रियों की मौत

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उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के दौरान अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण न होने सहित विभिन्न कारणों से रविवार तक 16 यात्रियों की मौत हो चुकी है। लगातार तीर्थयात्रियों की हृदय गति रुकने से मौत होना कई प्रश्न उठाती हैं।

चारधाम यात्रा में अधिकांश यात्री यमुनोत्री धाम से अपनी यात्रा का आरंभ करते हैं। यात्रा का शिड्यूल भी इसी तरह का बनता है। मैदानी क्षेत्रों से यात्री सीधे बड़कोट या फिर जानकी चट्टी पहुंचता है। समुद्रतल से बड़कोट की ऊंचाई 1280 मीटर है, जबकि जानकी चट्टी की ऊंचाई करीब 2400 मीटर है। यहां विश्राम करने के बाद तीर्थयात्री साढ़े पांच किलोमीटर की पैदल खड़ी चढ़ाई को पार करते हुए यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। यमुनोत्री धाम की समुद्रतल से ऊंचाई 3300 मीटर है। ऊंचाई के साथ खड़ी चढ़ाई और मौसम की विकटता भी यात्रियों के लिए जोखिम भरी होती है, जो यात्रियों का दम फुला देती है।

उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केएस चौहान कहते हैं कि हरिद्वार की समुद्रतल से ऊंचाई करीब 314 मीटर है। सुबह यात्री हरिद्वार से चलता है और सीधे जानकी चट्टी पहुंच जाता है। यही नहीं इसी 24 घंटे के अंतराल में तीर्थयात्री यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए भी पहुंचता है। तीर्थ यात्रियों का शरीर मैदान की गर्मी से एकदम पहाड़ की ऊंचाई पर घुल-मिल नहीं पाता है।

उत्तरकाशी जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डा. सुबेग सिंह कहते हैं कि आमजन की जीवनचर्या में बड़ा बदलाव आया है, जिसमें पैदल चलना छूट गया है और खानपान में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का सेवन बढ़ गया है। डा. सुबेग कहते हैं कि यमुनोत्री और केदारनाथ पैदल चलने के लिए काफी है। साथ ही रास्ता काफी चढ़ाई वाला भी है, जिसमें बीपी, शुगर के मरीजों को परेशानी होना तय है। इसके अलावा मैदानी क्षेत्र में इन दिनों काफी गर्मी है, जबकि यमुनोत्री क्षेत्र में हर दिन बारिश होने के कारण मौसम काफी ठंडा है। जिन यात्रियों की मौत हो रही है उनका मुख्य कारण एकदम गर्म क्षेत्र से ठंड क्षेत्र में आना और ऊंचाई व पैदल चढ़ाई है।

वरिष्ठ फिजिशियन डा. सुबेग सिंह कहते हैं कि तीर्थ यात्रियों के पंजीकरण पोर्टल में स्वास्थ्य संबंधित तथ्यों का उल्लेख किया जाना जरूरी है, जिससे उन यात्रियों की धामों के निकटवर्ती जांच केंद्रों में जांच हो सके। चारधाम यात्रा में अमरनाथ जैसी व्यवस्था हो, उससे बेहतर कुछ और नहीं हो सकता है। इससे धामों में इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी। तीर्थ यात्रियों को चारधाम यात्रा पर आने से पहले नियमित पैदल चलने और योग करने का अभ्यास करना भी जरूरी है।

दो चिकित्सकों के भरोसे सात हजार यात्रियों की जांच
यमुनोत्री में प्रतिदिन सात हजार यात्री आ रहे हैं, लेकिन जानकी चट्टी में इनकी जांच का जिम्मा सिर्फ एक फिजिशियन और एक अन्य चिकित्सक पर है। इस पर डा. केएस चौहान कहते हैं कि यमुनोत्री पैदल मार्ग पर स्वास्थ्य विभाग की अभी तक एक ही जांच टीम है। अब तीन जांच टीम तैनात करने की भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए शासन से अनुमति ली जा रही है, जिससे अधिकांश यात्रियों की स्वास्थ्य जांच हो सके।

उत्तरकाशी के सीएमओ डा. केएस चौहान कहते हैं कि तीर्थयात्रियों को पहाड़ के वातावरण से घुल-मिलने के लिए यात्रा के शेड्यूल में दिनों की संख्या बढ़ा देनी चाहिए, जिससे यात्री सीधे 314 मीटर की ऊंचाई से 2400 मीटर की ऊंचाई पर न पहुंचे। इसके अलावा यात्रियों को अपनी बीमारी बिल्कुल नहीं छिपानी चाहिए।

हृदय गति रुकने से मरने वाले यात्रियों की संख्या
वर्ष——–यमुनोत्री——–गंगोत्री
2014——–2——–0
2015——–3——–1
2016——–13——–6
2017——–17——–4
2018——–16——–2
2019——–12——–5
2022——–9 ——–3 ( आठ मई 2022 तक)



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