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पाकिस्तानी सगंठन के लिए धन जुटाने के मामले में दिल्ली की अदालत ने चार लोगों को किया बरी

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नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत (Court) ने आतंकवाद (Terrorism) के लिए धन जुटाने के मामले में आरोपी चार लोगों को बृहस्पतिवार को बरी कर दिया. राष्ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) यह साबित नहीं कर सका कि वे पाकिस्तान के एक संगठन के लिए स्लीपर सेल बनाने में संलिप्त थे जैसा पहले एजेंसी ने आरोप लगाया था.

विशेष न्यायाधीश परवीन सिंह ने कहा कि आरोपियों की गतिविधियां संदिग्ध जरूर हैं और वे हवाला लेन-देन की अवैध गतिविधियों में भी संलिप्त रहे हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे दुबई के रास्ते पाकिस्तान से धन भेजे जाने की बात साबित हो सके.

स्लीपर सेल बनाने की साजिश का आरोप
आरोपियों मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम, आरिफ गुलाम बशीर धरमपुरिया और मोहम्मद हुसैन मोलानी को एजेंसी ने कथित तौर पर पाकिस्तानी संगठन (Pakistani Organization) फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) से धन प्राप्त करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि यहां भारत विरोधी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन भेजकर देश में अशांति पैदा करने वाले स्लीपर सेल बनाने की साजिश थी.

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एनआईए ने कहा कि एफआईएफ, जमात-उद-दावा द्वारा स्थापित पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन है. आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जमात के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद ने उसे स्थापित किया था.

यएन ने घोषित किया था आतंकवाद संगठन
आरोप है कि एफआईएफ को 14 मार्च, 2012 को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी संगठन घोषित किया था. एनआईए ने चारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी तथा विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं 17, 20 और 21 के तहत आरोपित किया था.

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