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INS Vela: समंदर के भीतर लक्ष्मण रेखा खींचेगी ये पनडुब्बी, ताकत के बारे में जान कर करेंगे सैल्यूट

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मुंबई. भारतीय नौसेना (Indian  Navy) ‘प्रोजेक्ट 75’ (Project 75) के तहत वह अपनी चौथी स्टील्थ स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वेला (INS Vela) आज शामिल करेगी.  इस पनडुब्बी के सेवा में शामिल होने से नौसेना की युद्धक क्षमता में बढ़ोतरी होगी. ‘प्रोजेक्ट 75’ में स्कॉर्पीन डिजाइन (Scorpion design) की छह पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है. इनमें से तीन पनडुब्बियों – कलवरी, खंडेरी, करंज – को पहले ही सेवा में शामिल किया जा चुका है. नौसेना ने एक बयान में कहा, ‘भारतीय नौसेना की चौथी स्टील्थ स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी, INS Vela, 25 नवंबर 2021 को सेवा में शामिल होने के लिए तैयार है.’ पनडुब्बी का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने मेसर्स नेवल ग्रुप आफ फ्रांस (DCNS) के सहयोग से किया है. INS Vela का पिछला अवतार 31 अगस्त, 1973 को सेवा में शामिल किया गया था और यह 25 जून, 2010 को सेवा से हटी थी. इसने 37 वर्षों तक राष्ट्र की महत्वपूर्ण सेवा की थी.

आइए हम आपको आईएनएस वेला के बारे में कुछ अहम जानकारियां देते हैं जैसे इसका वजन कितना है और यह किन-किन हथियारों से लैस है. 

प्रोजेक्ट 75 क्या है?
आईके गुजराल सरकार के समय में 25
पनडुब्बियों के अधिग्रहण के लिए पी 75 पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 30 साल की योजना बनाई गई. साल 2005 में, भारत और फ्रांस ने छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण के लिए $ 3.75 बिलियन के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. पनडुब्बियों के निर्माण में भारत की ओर से मझगांव डॉक्स लिमिटेड कंपनी कर रही है तो वहीं फ्रांस की ओर से DCNS कार्यरत है.

सबमरीन का नाम वेला कैसे पड़ा?
वेला का नाम एक डिकमीशन्ड सबमरीन वेला के नाम पर रखा गया है, जिसने 1973 से 2010 तक नौसेना की सेवा की थी. पहले वेला सोवियत मूल की फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पनडुब्बी से संबंधित थी.

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वेला कितने लोगों को साथ ले जा सकती है?
नौसेना के सूत्रों ने कहा कि पनडुब्बी आठ अधिकारियों और 35 लोगों को ले जा सकती है.

वेला कौन से हथियारों से लैस है?
पनडुब्बी C303 एंटी टॉरपीडो काउंटरमेजर सिस्टम से लैस है. पनडुब्बी अपने साथ 18 टॉरपीडो या एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल या 30 माइंस तक ले जा सकती है.

(AP Photo/Rajanish kakade)

वेला का बेस क्या होगा?
वेला को भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान में शामिल किया जाएगा. इसका बेस मुंबई में होगा.

क्या कोविड -19 के चलते वेला की कमीशनिंग में देरी हुई?
वेला के समुद्री परीक्षणों में COVID 19 के कारण देरी हुई. इस वजह से कमिशनिंग में देरी हुई.

वेला की खासियत क्या है?
वेला की लंबाई 67.5 मीटर और ऊंचाई 12.3 मीटर है. बीम का माप 6.2 मीटर है. पानी के भीतर होने पर 20 समुद्री मील की हाईस्पीड और पानी पर यह 11 समुद्री मील स्पीड से चल सकती है. पनडुब्बी में चार MTU 12V 396 SE84 डीजल इंजन और शक्ति के लिए 360 बैटरी सेल हैं, और इसमें एक साइलेंट परामनेंटली मैग्नेटाइज्ड मोटर है.

युद्ध की स्थिति या शांतिकाल में क्या होगा वेला का काम?
वेला एक डीजल-इलेक्ट्रिक पावर्ड अटैक सबमरीन है. पनडुब्बी अटैक मिशन में शामिल हो सकती है, जिसमें एंटी सरफेस वारफेयर, एंटी सबमरीन वारफेयर, खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, माइन बिछाने और इलाके की निगरानी कर सकती है.

वेला के बाद कौन सी सबमरीन होगी कमीशन?
कलवरी के बाद दो और पनडुब्बियों, आईएनएस खंडेरी और आईएनएस करंज को शुरु किया गया. वेला चौथी सबमरीन है. इसके बाद पांचवी सबमरीन वागीर का सी ट्रायल चल रहा है जबकि छठे सबमरीन वाग्शीर का कंस्ट्रक्शन जारी है.

Tags: Indian army, Indian navy, Indian Navy rescue operation, INS Savitri



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