उत्तराखंड

शिव शक्ति मंदिर क्लेमनटाउन क्षेत्र में हुआ श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

भागवताचार्य अभिषेक कृष्ण शास्त्री ने कहा- भगवान की प्राप्ति का माध्यम है श्रीमद् भागवत कथा

देहरादून। आशिमा बिहार टर्नर रोड़ क्लेमैटन टाउन क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिव शक्ति मंदिर प्रांगण में 7 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। व्यास पीठ पर वैदिक रीति नीति एवं मंत्रोच्चार के बीच कलशों की स्थापना की गई। वैदिक रीति के साथ शुरू हुई कलश शोभायात्रा में कस्बा की महिलाओं सैकड़ो की संख्या में कलश यात्रा में शामिल होकर सिर पर कलश रख कर गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। आयोजक मनमोहन सक्सेना, रश्मि सक्सेना ने कहा श्रीमद भागवत कथा के आयोजन से समूचा क्षेत्र भक्तिमय का वातावरण बना हुआ था। भागवत कथा के सफल आयोजन का श्रेय आशिमा विहार आवासीय कल्याण समिति एवं समस्त कालोनीवासियों को जाता है। भागवताचार्य प्रसिद्ध भागवताचार्य/कथा प्रवक्ता साधनधाम आश्रम, बिठूर तीर्थ के पीठाधीश्वर श्रेद्वय अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा कराने एवं सुनने का बहुत बड़ा महत्व है। उन्होंने भागवत कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने को कहा।

देहरादून के आशिमा बिहार टर्नर रोड़ क्लेमैटन टाउन क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिव शक्ति मंदिर प्रांगण पर दिव्य और भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। 09 अगस्त से 15 अगस्त तक चले श्रीमद् भागवत कथा का संमापन पूर्णाहुति और भंडारे के साथ हुआ। 16 अगस्त को हुए हवन पूजन, पूर्णाहुति, के साथ ही 51 जोड़ो द्वारा सार्वजनिक रूद्राभिषेक किया गया। श्रीमद् भागवत कथा के आयोजक शिव शक्ति भगवान एवं श्री मोहिनी बिहारी जी सरकार ने किया। इसके साथ ही आशिमा विहार आवासीय कल्याण समिति एवं समस्त कालोनीवासियों का प्रयास सराहनीय रहा। इस आयोजन को सफल बनाने में मनमोहन सक्सेना, रश्मि सक्सेना, कुलदीप बालिया, हिमानी वालिया, विनोद मलिक, कामिनी मलिक सहित समस्त कालोनीवासी शामिल रहे। श्रीमद्भागवत कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण लाभ लिया।

श्रीमद् भागवत कथा में प्रसिद्ध भागवताचार्य/कथा प्रवक्ता साधनधाम आश्रम, बिठूर तीर्थ के पीठाधीश्वर श्रेद्वय अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि भगवान की प्राप्ति का माध्यम ही श्रीमद् भागवत कथा है और कथा श्रवण करने से हमेशा आनंद की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने 11 वर्ष 56 दिन की आयु में कंस का वध कर दिया था। कंस वध के बाद ही भगवान कृष्ण ने अपने माता-पिता को भी आजाद कराया। कंस वध के दौरान कंस ने कहा था कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें मुक्ति देने वाला हमारे घर पर आया है।

कथा का वाचन करते हुए प्रसिद्ध भागवताचार्य/कथा प्रवक्ता साधनधाम आश्रम, बिठूर तीर्थ के पीठाधीश्वर श्रेद्वय अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि मां का दुलार ही जीवन में सर्वाेपरि होता है, क्योंकि मां के दुलार करने से आयु, यश बल और बुद्धि में वृद्धि होती है। माता देवकी ने कहा कि हमने तो कुछ पल ही कन्हैया को अपने पास रखा है, लेकिन जसोदा ने तो इसको दुलार दिया लालन-पालन किया है। असली मां की हकदार जसोदा ही है और जसोदा का दुलार पाकर ही आज हमारा कन्हैया इतना बड़ा हुआ है।

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